रविवार, 19 फ़रवरी 2012

ये दुआ मांगता हूँ!


नहीं मांगता शजर-ए- अमीरी या खुदा ,
मिलती रहे सबको रोटी ,ये दुआ मांगता हूँ!

गैरों की खुशहाली से न हो जलन,
दिल में बस सब्र -ए- अरमां मांगता हूँ !!

निकले न लब से बद्दुआ किसी के खातिर ,
इरादे नेक और मुकम्मल इमां मांगता हूँ !!

उजड़े न चैन - ओ- अमन किसी का और,
तेरे ख्वाबों का खुशनुमा जहाँ मांगता हूँ !!

बँट गयी है दुनिया मजहबों में बहुत,
ऐ खुदा इंसानियत का एक कारवां मांगता हूँ !!

नहीं होते इंसान बुरे , हालात बना देते हैं ,
ऐसे बुरे  हालातों का  न होना मांगता हूँ !!

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