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रात गुज़र जाएगी

मेहरबानियां उनकी इसकदर हैं मुझपर,
गिनने बैठूंगा तो रात गुज़र जाएगी !

रहने दो ख़ामोश लबों को,
असर होने दो दुवाओं का;
जख्म की नुमाइश में बात गुज़र जाएगी !

सितमगर तेरा हरेक सितम,
मेहरबानी से बढ़कर है मेरे लिए;
ठहर गया जो लम्हा, सौगात गुज़र जाएगी!

तड़प उठता है ज़िगर इक याद पे,
सब्र कर लेता हूँ ये सोंचकर;
छूली जो तस्वीर तेरी, ऐतिहात गुज़र जाएगी!

टिप्पणियाँ

  1. आपकी लिखी रचना "पांच लिंकों का आनन्द में" सोमवार 13 फरवरी 2017 को लिंक की गई है.... http://halchalwith5links.blogspot.in पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

    जवाब देंहटाएं
  2. ज़ख्मों की नुमाइश में बात गुजर जाएगी ..क्या बात है .

    जवाब देंहटाएं
  3. सितमगर तेरा हरेक सितम,
    मेहरबानी से बढ़कर है मेरे लिए;
    ठहर गया जो लम्हा, सौगात गुज़र जाएगी!
    वाह....
    बहुत सुन्दर।

    जवाब देंहटाएं

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