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बड़े बड़े करते हैं मुजरा जिंदगी की थाप पर

बड़े बड़े करते हैं मुजरा जिंदगी की थाप पर,
गुजरते ही लोग रख देंगे तुम्हें भी ताख पर।

गुरूर करना ठीक नहीं होता किसी के लिए,
गर्दिशे खाक हुए जो थे जमाने की आंख पर ।

रौशन थे जो सितारे फलक पर कभी,
बुझ गये सभी चिता की ठंडी राख पर।

भरने को पेट, ढकने को बदन काफी है,
कोई नहीं खरीदता है कफ़न नाप कर ।

भूखे को निवाला दे, रोते हुए को हंसा,
मिटाकर नफरत दिलों से, खुद को आफताब कर।

बड़े बड़े करते हैं मुजरा जिंदगी की थाप पर,
गुजरते ही लोग रख देंगे तुम्हें भी ताख पर।

टिप्पणियाँ

  1. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल रविवार (28-10-2018) को "सब बच्चों का प्यारा मामा" (चर्चा अंक-3138) पर भी होगी।
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    --
    करवाचौथ की
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

    जवाब देंहटाएं
  2. आपकी लिखी रचना आज "पांच लिंकों का आनन्द में" बुधवार 31अक्टूबर 2018 को साझा की गई है......... http://halchalwith5links.blogspot.in/ पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!



    .

    जवाब देंहटाएं
  3. Ration Card
    आपने बहुत अच्छा लेखा लिखा है, जिसके लिए बहुत बहुत धन्यवाद।

    जवाब देंहटाएं

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