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शेष

तुम नही हो 
तो भी तुम 
मेरे अंदर हो,
सब कुछ लेकर 
चले गये पर 
कुछ शेष रहा 
मेरे अंदर तुम्हारा 
उस शेष को 
न लेजा सके तुम 
क्योंकि वह शेष 
मेरा नहीं तुम्हारा था !


तुम्हारा होना या न होना 
नहीं महसूसता अब 
और यह शेष तुम्हारे 
अस्तित्व की
स्मृति नहीं मिटने देता है !

टिप्पणियाँ

  1. अस्तित्व क्या मिट सकेगा फिर भी ...
    ये माया है जो हो के भी नहीं होगी जैसे न होके भी है ...

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  2. bahut hi umda.... badhai..
    Please visit my Tech News Time Website, and share your views..Thank you

    जवाब देंहटाएं

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बेख्याली

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