सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

चलता जा राही......

चलता जा राही
साँसों के चलने तक,
रुकना न कभी
मंजिल के मिलने तक।
चलता जा राही..........

जीवन क्या है
बहती एक धारा है,
जीता वही जो
मन से कभी न हारा है।
रात अभी कहाँ,
सूरज के ढलने तक।
चलता जा राही
साँसों के चलने तक।

सुख-दु:ख
तो आने जाने हैं
पल भर को
ही खोने पाने हैं
जलना ही जीवन है
जलता जा
तम के हरने तक,
चलता जा राही
साँसों के चलने तक।

टिप्पणियाँ

एक टिप्पणी भेजें