सोमवार, 17 दिसंबर 2018

कीमत

तुम आ गए हो तो रौनक आ गई है
गरीबखाने  में
वगरना कोई कब्रिस्तां में जश्न मनाता है क्या।

एक इश्क ही तो है जिसमें लोग लुट जाते हैं,
यूं ही मुफ्त में कोई वजूद अपना मिटाता है क्या।

जो तुम कुछ दे देते हो एक दुआ के खातिर,
वह फकीर कभी अपना एहसान जताता है क्या।

मुनासिब है कि पी जाएं मयखाने को एक प्याले में डालकर,
कब कौन कीमत कोई साकी की लगाता है क्या।

तुम आ गए हो तो रौनक आ गई है
गरीबखाने  में
वगरना कोई कब्रिस्तां में जश्न मनाता है क्या।

शुक्रवार, 23 नवंबर 2018

मेरे हाकिम यह तो बता तेरा पयाम क्या है

मेरे हाकिम यह तो बता तेरा पयाम क्या है,
अवाम की नजरों में  तेरा आयाम क्या है।

चंद टुकड़ों खातिर देश को ही बेच दिया,
ये गद्दारी नहीं तो फिर नमक हराम क्या है।

फरामोशियां दिखती हैं तेरे अहसानों में,
मुखालिफों के वास्ते एहतराम क्या है।

बहुत सारे ख्वाब हैं इन आंखों की पलकों पर,
अब ये तुम्हारी नई सुबह क्या, शाम क्या है।

मिट जाएगी यह शोहरत तेरी पल भर में,
बता फिर जन्नत के खातिर इंतज़ाम क्या है।

मंगलवार, 20 नवंबर 2018

इस शहर में हर शख्स बिमार दिखता है

इस शहर में हर शख्स बिमार दिखता है,
तेरी शक्ल में परवरदिगार दिखता है।

कितना फरेब है दिलों में लोगों के,
हर चौराहे पर बाजार दिखता है।

क्या मासूमियत है इनके चेहरों पर,
मुझको तो बख्तर में हथियार दिखता है।

खड़ा वो शख्स जो दुश्मनों के साथ है,
हमदम मेरा जिगरी यार दिखता है।


वो शख्स जुबां मजहबी बोल रहा है,
हमको तो सियासत दार दिखता है।

शनिवार, 3 नवंबर 2018

तुम्हें तुम्हारा आफताब मुबारक

तुम्हें तुम्हारा आफताब मुबारक
हमको हमारा ये चराग मुबारक।

तुम क्या मुकम्मल करोगे मसलों को,
तुम्हें ही तुम्हारा जवाब मुबारक।

हो सकते थे और बेहतर हालात,
रख लो, तुम्हें तुम्हारा हिसाब मुबारक ।

सूरत बदलने से नहीं बदलती सीरत,
तुमको ये तुम्हारा नया हिजाब मुबारक।

खुद ही खुद तुम खुदा बन बैठे हो
तुम्हें यह तुम्हारा खिताब मुबारक।

तुम्हें तुम्हारा आफताब मुबारक
हमको हमारा ये चराग मुबारक।

सोमवार, 29 अक्तूबर 2018

अपना हिसाब फरेबी लिखते हैं

ये वो लोग हैं जो बाजार खरीदते हैं।
ना कभी हारते हैं ना कभी जीतते हैं ।

हर शाम सौदा होता है इमानदारी का,
 हर शाम जमीर यहां पर बिकते हैं ।

कुछ एक हैं इस बाजार में अब भी,
जो अपना हिसाब फरेबी लिखते हैं।

लोग बड़े ही शातिर है लेन-देन में,
काली नीयत उजला लिबास रखते हैं।

होशियार रहना देश के इन गद्दारों से,
नेता जो कुछ कुछ शरीफ दिखते हैं।

ये वो लोग हैं जो बाजार खरीदते हैं।
ना कभी हारते हैं ना कभी जीतते हैं ।

शनिवार, 27 अक्तूबर 2018

जब से वो मेरे साथ सरेआम हो गया है

जब से वो मेरे साथ सरेआम हो गया है,
इस शहर में वो भी बदनाम हो गया है।।


लोग यूं ही नहीं उठाते हैं अंगुलियां मुझ पर
शहर के रहीसों में मेरा भी नाम हो गया है।

जलते हैं तो जलने दो, ये जमाने वाले हैं;
इनका तो जलते रहना ही काम हो गया है।

जरायम पेशा जब से हुए सफ़ेदपोश,
लुच्चे लफंगों का जीना हराम हो गया है।

जो था कभी रिंद के लबों का लफ्ते जिगर,
महफिल का टूटा हुआ जाम हो गया है।

जब से वो मेरे साथ सरेआम हो गया है,
इस शहर में वो भी बदनाम हो गया है।।

शुक्रवार, 26 अक्तूबर 2018

बड़े बड़े करते हैं मुजरा जिंदगी की थाप पर

बड़े बड़े करते हैं मुजरा जिंदगी की थाप पर,
गुजरते ही लोग रख देंगे तुम्हें भी ताख पर।

गुरूर करना ठीक नहीं होता किसी के लिए,
गर्दिशे खाक हुए जो थे जमाने की आंख पर ।

रौशन थे जो सितारे फलक पर कभी,
बुझ गये सभी चिता की ठंडी राख पर।

भरने को पेट, ढकने को बदन काफी है,
कोई नहीं खरीदता है कफ़न नाप कर ।

भूखे को निवाला दे, रोते हुए को हंसा,
मिटाकर नफरत दिलों से, खुद को आफताब कर।

बड़े बड़े करते हैं मुजरा जिंदगी की थाप पर,
गुजरते ही लोग रख देंगे तुम्हें भी ताख पर।

कीमत

तुम आ गए हो तो रौनक आ गई है गरीबखाने  में वगरना कोई कब्रिस्तां में जश्न मनाता है क्या। एक इश्क ही तो है जिसमें लोग लुट जाते हैं, यूं ह...