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June, 2013 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

नया सवेरा

आज सूरज फिर आया तुम्हारे दरवाजे पर; एक नया सवेरा लेकर!
दूर कर निराशा की तमीशा; उपजाओ आशा! कैसी चिंता, बीते कल की; बीत गया वह क्षण; गुजर गया तम विवर !आज सूरज फिर आया तुम्हारे दरवाजे पर; एक नया सवेरालेकर!
हो चिन्तन; न हो चिंता जीवन की! तज दो निज व्यथा का व्योमोहन! धर  दो पग अब कर्म पथ पर! आज सूरज फिर आया तुम्हारे दरवाजे पर; एक नया सवेरालेकर!
व्यर्थ भ्रम उर में भर,  विचलित करते  तुम्हे शून्य- शिखर! होकर उर्जस्वित, प्रत्यक्ष का वरण कर  आज सूरज फिर आया तुम्हारे दरवाजे पर; एक नया सवेरालेकर!