शुक्रवार, 28 जून 2013

नया सवेरा

आज
सूरज फिर आया
तुम्हारे दरवाजे पर;
एक नया सवेरा लेकर!

दूर कर
निराशा की तमीशा;
उपजाओ आशा!
कैसी चिंता,
बीते कल की;
बीत गया वह क्षण;
गुजर गया तम विवर !
आज
सूरज फिर आया
तुम्हारे दरवाजे पर;
एक नया सवेरा लेकर!

हो चिन्तन;
न हो चिंता जीवन की!
तज दो निज व्यथा का व्योमोहन!
धर  दो पग अब
कर्म पथ पर!
आज
सूरज फिर आया
तुम्हारे दरवाजे पर;
एक नया सवेरा लेकर!

व्यर्थ भ्रम उर में भर, 
विचलित करते 
तुम्हे शून्य- शिखर!
होकर उर्जस्वित,
प्रत्यक्ष का वरण कर 
आज
सूरज फिर आया
तुम्हारे दरवाजे पर;
एक नया सवेरा लेकर!

7 टिप्‍पणियां:

  1. आज
    सूरज फिर आया
    तुम्हारे दरवाजे पर;
    एक नया सवेरा लेकर!

    आशा और उमंग बनी रहना चाहिये.

    रामारम.

    उत्तर देंहटाएं
  2. आज
    सूरज फिर आया
    तुम्हारे दरवाजे पर;
    एक नया सवेरा लेकर!

    बहुत बढ़िया,सुंदर प्रस्तुति,,,
    Recent post: एक हमसफर चाहिए.

    उत्तर देंहटाएं
  3. बेह्तरीन अभिव्यक्ति …!!शुभकामनायें.
    आपका ब्लॉग देखा मैने और कुछ अपने विचारो से हमें भी अवगत करवाते रहिये.http://saxenamadanmohan1969.blogspot.in/
    http://saxenamadanmohan.blogspot.in/

    उत्तर देंहटाएं

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