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आसान नहीं होता हम हो जाना

मुझे मालूम है
नहीं फर्क पड़ता तुम्हें
मैं तुम्हारे साथ हूं
या कि गुजर गया हूं इस जमाने से।

अक्सर तुम मुझे मिल जाती हो मेरी नींदों के ख्वाबों में,

क्या करूं मैं तन्हा रह कर भी तन्हा नहीं रह पाता हूं,
तुम्हारे साथ बिताए हुए क्षण मुझे अकेला रहने ही नहीं देते।


तुम्हें आदत हो गई होगी
अकेले रहने की
क्योंकि
तुमने कभी अपने आप को
हम होने ही नहीं दिया।


शायद हम होने की प्रक्रिया
इतनी आसान नहीं होती,
हम होने के लिए
मैं के वजूद को
मिटाना पड़ता है।

जैसे कि तुम जी रहे हो मुझ में और मैं जी रहा हूं तुम में।

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बेख्याली

न जाने किस ख्याल से बेख्याली जायेगी; जाते - जाते ये शाम भी खाली जायेगी। गर उनके आने की उम्मीद बची है अब भी, फिर और कुछ दिन  मौत भी टाली जायेगी। कुछ तो मजाज बदलने दो मौसमों का अभी, पुरजोर हसरत भी दिल की निकाली जायेगी। कनारा तो कर लें इस जहाँ से ओ जानेजां, फिर भी ये जुस्तजू हमसे न टाली जायेगी । कि ख्वाहिश है तुमसे उम्र भर की साथ रहने को, दिये न जल पाये तो फिर ये दिवाली  जायेगी।

मतलब का मतलब......

 मतलब की दुनिया है-जानते सभी हैं, फिर भी यहाँ मतलब निकालते सभी हैं। अपनापन एक दिखावा भर है फिर भी, जाहिर भले हो लेकिन जताते सभी हैं। झूठी शान -ओ-शौकत चंद लम्हों की है, ये जानते हुए भी दिखाते सभी हैं। नहीं रहेगी ये दौलत सदा किसी की,  जमाने में पाकर इठलाते सभी हैं। मौत है मुत्मइन इक न इक दिन आएगी, न जाने क्यूँ मातम मनाते सभी हैं।

क्या हूँ मैं?

मुझे वो पढ़ता रहा  गढ़ता रहा  कभी एलोरा की गुफाओं , कभी पिकासो की मनः स्थितियों में! लेकिन  कभी वो नहीं  बदल सका  अपनी संकुचित  और शंकालु  प्रवृत्ति  और  डसने को  तत्पर रहता है हर क्षण ! और आज तक मैं अनभिज्ञ   ही रही  मेरा  अस्तित्व  और मैं क्या हूँ  इस पुरुष प्रवृत्ति  के लिए !   ?