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मुझे स्त्री ही रहने दो

मैं नहीं चाहूंगी
बनना देवी
मुझे नहीं चाहिए
आठ हाथ और
सिद्धियां आठ।  

मुझे स्त्री ही
रहने दो ,
मुझे न जकड़ो
संस्कार और
मर्यादा की जंजीरों में।

मैं भी तो रखती हूँ
सीने में एक मन ,
जो कि तुमसे ज्यादा
रखता है संवेदनाएं
समेटे हुए
भीतर अपने।  


आखिर मैं भी तो हूँ
आधी आबादी
इस पूरी दुनिया की।

टिप्पणियाँ

  1. मर्मस्पर्शी अभिव्यक्ति सर।
    सादर
    ----
    जी नमस्ते,
    आपकी लिखी रचना शुक्रवार ७ अप्रैल २०२३ के लिए साझा की गयी है
    पांच लिंकों का आनंद पर...
    आप भी सादर आमंत्रित हैं।
    सादर
    धन्यवाद।

    जवाब देंहटाएं
  2. समय बहुत बदल गया : आज नहीं जकड़ी जा सकती स्त्रियाँ

    जवाब देंहटाएं
  3. आठ हाथ और आठ सिद्धियाँ तो जन्मसिद्ध हैं स्त्रियों में ...हाँ अब इन बनावटी भक्तों के बश में नहीं रहेगी स्वयंसिद्धा ।

    जवाब देंहटाएं
  4. मूर्तियों में दिख जाते हैं आठ हाथ .....वरना स्त्रियों को काम करते देखिए तो आठ हाथ ही दिखेंगे ।

    जवाब देंहटाएं
  5. समाज को नारी का बन्ध्या और पूज्य रूप सदा भाया है।श्रद्धा की देवी बनाकर उसे सदियों उसकी सहज भावनाओं से सदैव दूर रखा गया।पर समय बदलने के साथ नारी ने भी मानवी होने के अपने अधिकार को माँगा है।उसे भी मानव होने के नाते अपनी खुशियों को मुक्त भाव से जीने का अधिकार है।

    जवाब देंहटाएं

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स्त्री

 चुप रह जाती हूँ सुनकर तुम्हारे तिरस्कृत वचन इसलिए नहीं कि तुम पुरुष हो, बल्कि इसलिए  सम्बन्धों और संस्कारों की श्रृंखला, कहीं कलंकित न हो जाए  समर्पण की पराकाष्ठा । मुझे भी आता है तर्क-वितर्क करना, पर चुप रह जाती हूँ कि कौन करेगा सम्पूर्ण सृष्टि का संवर्धन।  स्त्री ही बन सकती है स्त्री, नहीं हो सकता विकल्प कोई स्त्री का । कहीं बिखर न जाय

"मेरा भारत महान! "

सरकार की विभिन्न  सरकारी योजनायें विकास के लिए नहीं; वरन "टारगेट अचीवमेंट ऑन पेपर" और  अधिकारीयों की  जेबों का टारगेट  अचीव करती हैं! फर्जी प्रोग्राम , सेमीनार और एक्सपोजर विजिट  या तो वास्तविक तौर पर  होती नहीं या तो मात्र पिकनिक और टूर बनकर  मनोरंजन और खाने - पीने का  साधन बनकर रह जाती हैं! हजारों करोड़ रूपये इन  योजनाओं में प्रतिवर्ष  विभिन्न विभागों में  व्यर्थ नष्ट किये जाते हैं! ऐसा नहीं है कि इसके लिए मात्र  सरकारी विभाग ही  जिम्मेवार हैं , जबकि कुछ व्यक्तिगत संस्थाएं भी देश को लूटने का प्रपोजल  सेंक्शन करवाकर  मिलजुल कर  यह लूट संपन्न करवाती हैं ! इन विभागों में प्रमुख हैं स्वास्थ्य, शिक्षा, सुरक्षा; कृषि, उद्यान, परिवहन,  रेल, उद्योग, और भी जितने  विभाग हैं सभी विभागों  कि स्थिति एक-से- एक  सुदृढ़ है इस लूट और  भृष्टाचार कि व्यवस्था में! और हाँ कुछ व्यक्ति विशेष भी व्यक्तिगत लाभ के लिए, इन अधिकारीयों और  विभागों का साथ देते हैं; और लाभान्वित होते है या होना चाहते ह