सत्ताधारी हो गये हैं सत्तालोलुप , सांठ -गाँठ और लेन -देन के बिना चलता ही नहीं कुछ काम। अस्पताल , स्कूल थाना या कोई भी सरकारी संस्थान, सब जगह फैला है भ्रष्टाचार। नहीं,नहीं इसका नाम लेकर न करो इन्हें बदनाम यही तो है आजकल का शिष्टाचार। व्यभिचार और भ्रष्टाचार का कोढ़ फैल चुका है समाज के नश -नश में , नहीं दिख रहा कोई उपचार , क्या करे कोई , जब सब होगये स्वार्थवश लाचार। कुछ नहीं हो सकता इस राम सहारे रामराज का या तो जनता सो रही है, या फिर रोज़ी -रोटी के फेर में रो रही है। आज नहीं तो कल होना है बंटाधार।