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रिश्ते !








रिश्ते
और उनके मायने
न जाने कहाँ छूट गये !

सारी संवेदनाएं
मात्र एक
नाटक पात्र स दृश्य
प्रदर्शित की जाती हैं !


मार्मिक दुर्घटनाओं पर
आलेख, टिप्पणी
पुस्तक रचना या
या फिल्मांकन किया जा सकता है!


परन्तु,
इन संवेदनाओं से
जुड़े कोमल तंतु जैसे रिश्तों के
आयाम और मूल्य स्थापित करना ,
निरर्थक और विडम्बना पूर्ण हैं!




पर अर्थ के उपार्जन हेतु 
रिश्तो को बेंच देते है
और उनका गला घोटने में भी
कोई ग्लानि नही होती !

टिप्पणियाँ

  1. गहन भाव लिये बेहतरीन अभिव्‍यक्ति

    जवाब देंहटाएं
  2. सत्य को प्रदर्शित करती हुई सार्थक रचना ....वाह

    जवाब देंहटाएं
  3. रिश्तों में अब भावनाएं नहीं स्वार्थ बसता है...
    आप मेरे ब्लॉग पर आएं...एक योजना पर काम कर रही हूं...आप उसे देख लीजिए और अवगत कराइए...

    जवाब देंहटाएं

  4. कल 03/12/2012 को आपकी यह बेहतरीन पोस्ट http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
    धन्यवाद!

    जवाब देंहटाएं
  5. "अर्थ के उपार्जन हेतु ..." बहुत सटीक व सच्ची बात है वाकई गहन विचार ..

    मेरी नयी पोस्ट पर आपका स्वागत है
    http://rohitasghorela.blogspot.com/2012/11/3.html

    जवाब देंहटाएं

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 मतलब की दुनिया है-जानते सभी हैं, फिर भी यहाँ मतलब निकालते सभी हैं। अपनापन एक दिखावा भर है फिर भी, जाहिर भले हो लेकिन जताते सभी हैं। झूठी शान -ओ-शौकत चंद लम्हों की है, ये जानते हुए भी दिखाते सभी हैं। नहीं रहेगी ये दौलत सदा किसी की,  जमाने में पाकर इठलाते सभी हैं। मौत है मुत्मइन इक न इक दिन आएगी, न जाने क्यूँ मातम मनाते सभी हैं।

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