रविवार, 20 नवंबर 2011

मुझे न तुम याद आओं .........

सावन के झूलों -----
मुझे न तुम याद आओं  
बागों में वादियों की वो छटाएं,
शामों में घाटियों की वो घटाएं/
मुझे न तुम याद आओं .........
ऐ वो बिछुड़ी कलियाँ ,ऐ वो फूलों 
सावन के झूलों -----

भीग जाते हैं मेरे सूने नयन ,
याद करके तुम्हारी प्यारी चितवन /
मुझे न तुम याद आओं .........
ऐ मेरी बीते कल की वो भूलों 
सावन के झूलों ...........

कहाँ गये तुम और तुम्हारे वादे,
किस कयामत के है अब ये इरादे 
मुझे न तुम याद आओं .........
ऐ मेरे व्यथित व्यथा के वो शूलों
 सावन के झूलों ...........

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