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भिक्षुक

लड़खड़ाते   कदमों से,
लिपटा हुआ चिथड़ों से,
दुर्बल तन, शिथिल मन;
लिए हाँथ में भिक्षा का प्याला !
वह देखो भिक्षुक सभय,
पथ पर चला आ रहा है/

क्षुधा सालती उदर को,
भटक रहा वह दर-दर को,
सभ्य समाज का वह बिम्ब;
जिसमें उसने जीवन ढाला,
खोकर मान-अभिमान,
पथ पर चला आ रहा है/

हर प्राणी लगता दानी ,
पर कौन सुने उसकी कहानी,
तिरिष्कार व घृणा से,
जिसने  है उदर को पला ;
घुट-घुट कर जीता जीवन,
पथ पर चला जा  रहा है/

हाँथ पसारे, दाँत दिखाए,
राम रहीम की याद दिलाये;
मन को देता ढाढस;
मुख पर डाले ताला,
लिए  निकम्मा का कलंक,
पथ पर चला जा  रहा है/

टिप्पणियाँ

  1. हूबहू चित्रण ... जीवन के सत्य को झेलते हैं ये ...

    उत्तर देंहटाएं
  2. हर प्राणी लगता दानी ,
    पर कौन सुने उसकी कहानी,
    सच कहा आपने |
    latest post महिषासुर बध (भाग २ )

    उत्तर देंहटाएं
  3. आपकी लिखी रचना मुझे बहुत अच्छी लगी .........
    शनिवार 19/10/2013 को
    http://nayi-purani-halchal.blogspot.in
    में आपकी प्रतीक्षा करूँगी.... आइएगा न....
    धन्यवाद!

    उत्तर देंहटाएं
  4. सच कौन सुने उसकी कहानी......
    मार्मिक...

    अनु

    उत्तर देंहटाएं
  5. बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
    --
    आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल शुक्रवार (18-10-2013) "मैं तो यूँ ही बुनता हूँ (चर्चा मंचःअंक-1402) पर भी होगी!
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

    उत्तर देंहटाएं
  6. कल 20/10/2013 को आपकी पोस्ट का लिंक होगा http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर
    धन्यवाद!

    उत्तर देंहटाएं
  7. निराला की भिक्षुक कविता याद आ गयी...साधुवाद...।

    उत्तर देंहटाएं
  8. सचमुच सत्य चित्रण , भाव पूर्ण रचना , बधाई आपको ।

    उत्तर देंहटाएं
  9. प्रिय ब्लागर
    आपको जानकर अति हर्ष होगा कि एक नये ब्लाग संकलक / रीडर का शुभारंभ किया गया है और उसमें आपका ब्लाग भी शामिल किया गया है । कृपया एक बार जांच लें कि आपका ब्लाग सही श्रेणी में है अथवा नही और यदि आपके एक से ज्यादा ब्लाग हैं तो अन्य ब्लाग्स के बारे में वेबसाइट पर जाकर सूचना दे सकते हैं

    welcome to Hindi blog reader

    उत्तर देंहटाएं
  10. बहुत सुंदर चित्रण , भाव पूर्ण रचना , बधाई आपको ।

    उत्तर देंहटाएं
  11. हर प्राणी लगता दानी ,
    पर कौन सुने उसकी कहानी,
    तिरिष्कार व घृणा से,
    जिसने है उदर को पला ;
    घुट-घुट कर जीता जीवन,
    पथ पर चला जा रहा है/
    बहुत ही भावुक करते शब्द

    उत्तर देंहटाएं

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छूटे हुए पल

कहीं कुछ छूट जाता है
जब न समेट पाने की वजह से नहीं,
बल्कि जानबूझकर
छोड़ दिया जाता है;
वह कचोटता रहता है उम्रभर।

छोड़े जाने की
कोई तो वजह रही होगी
या रही होगी मजबूरी,
जब हमने छोड़ दिया;
उस छूटे हुए पल को,
जिसे उम्र आज भी 
आकुल है पा लेने को।
काश.....................

यादें: जो रहती हैं ताउम्र ताज़ी।

जज़्बातों को
तुम समेट लेना,
मैं रख लूँगा
तुम्हारा मन। कि बिखरने न पाये
सबंधों की गठरी
और हाँ,
बोझ भी न बनने पाये।
बना रहे
जीवन में हल्कापन।। क्यों
समय से पहले
टूट जाती हैं
ये ख्वाहिशें, या
हो जाती हैं पैदा
नयी ख्वाहिशें,
पूरी होने पर।
क्या यही है जीवन।। तुम्हारी अँगुलियों में,
लिपटा हुआ
मेरे केशों का
बिखरा हुआ प्रेम।
समेट रहा हूँ
शामों को यादों में
भीग रहा है हमारा मन।।

इंतजार, इंतजार करो

तुम्हें याद होगा!
नीली रोशनी में
काँपते हुए  
नीले होंठों से कहा था-
"--------------------!" 

तुम्हें याद होगा! 
सावन की हल्की  फुहारों में
सकुचाते ह्रदय से कहा था- 
"------------------!" 

तुम्हें याद होगा! 
अंगीठी के पास
लाल सुर्ख चेहरे  से 
शर्माते हुए कहा था- 
"----------------!" 

और यह कहती हुई 
मुझे तनहाई में  
सन्नाटे देकर चली गयी- 
" इंतजार, इंतजार करो ! "