बुधवार, 14 जनवरी 2015

किस खता की सजा दिये जाते हो

किस खता की सजा दिये जाते हो;
खुद ही खुद से अजनबी हुए जाते हो ।

माना गमों का साथ है तमाम उम्र भर;
नाहक ही अश्कों को पिए जाते हो।

सब्र करलो ,सब कुछ नहीं मिलता सबको,
क्यों कर ही मुफलिसी में जिये जाते हो ।

बादलों की छाँव का क्या यकीन करना ,
धूप पर भी क्यों यकीन किये जाते हो।

स्वप्न सी है यह दुनिया दिखावे की दोस्तों,
हकीकत से क्यों दुश्मनी किये जाते हो।

7 टिप्‍पणियां:

  1. वाह .. हर शेर लाजवाब ... दाद कबूल कीजिये हजूर ...

    उत्तर देंहटाएं
  2. हर शब्द अपनी दास्ताँ बयां कर रहा है आगे कुछ कहने की गुंजाईश ही कहाँ है बधाई स्वीकारें

    कभी फुर्सत मिले तो ….शब्दों की मुस्कराहट पर आपका स्वागत है

    उत्तर देंहटाएं
  3. bhut accha likhte ho g if u wana start a best blog site than visit us
    http://www.nvrthub.com

    उत्तर देंहटाएं
  4. bhut accha likhte ho g if u wana start a best blog site than visit us
    http://www.nvrthub.com

    उत्तर देंहटाएं
  5. bhut accha likhte ho g if u wana start a best blog site look like dis or professional 100% free than visit us
    http://www.nvrthub.com

    उत्तर देंहटाएं

अन्य पठनीय रचनाएँ!

Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...