मंगलवार, 10 मार्च 2015

मुझे मेरे यार का ठिकाना बता दे !

तुझे मंदिर , मस्जिद काबा मुबारक ,
मुझे मेरे यार का ठिकाना बता दे !

सलीका क्या है तेरी महफ़िल का ,
साकी मुझे मेरा पैमाना बता दे !

नूरे-चश्म की मयकशीं का नशा कहाँ ,
रहे न होश वो मयखाना बता दे !

तरसती है ये निगाह दीदार को ,
दीदारे-यार नजराना बता दे !

बाकी भी गुजर जाय खुशफहमी में ,
गमे-दिल का सनम खजाना  बता दे !​

6 टिप्‍पणियां:

  1. सभी अशआर दिल को छूते हुए...बहुत ख़ूबसूरत ग़ज़ल...

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  2. आयुर्वेदा, होम्योपैथी, प्राकृतिक चिकित्सा, योगा, लेडीज ब्यूटी तथा मानव शरीर
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