रुनझुन करती पायलिया
शाम ढले तुम आजाओ !
चौंक उठती हैं ये साँसें,
तेरे आने की आहट पाकर !
नाम से ही तेरे चंदा भी
छुप जाता अम्बर में जाकर!
अंधियारे जीवन में तुम
आकर उजाला कर जाओ!
रुनझुन करती पायलिया
शाम ढले तुम आजाओ !
आपके विचारों का प्रतिबिम्ब !
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