सीं दो मेरे होठो को,
अब और गीत गा न पाउँगा !
तन्हा-तन्हा रातें हैं,
बीते कल की बातें है,
तेरी याद मैं भुला न पाउँगा !
कहाँ गयीं वो कसमें ,
कहाँ गये वादे रस्में ,
चैन दिल को दिला न पाउँगा !
मेरे जीवन की तुम सांसें,
तुमसे जुडी हैं मेरी आशें,
तुझ बिन खुद को जिला न पाउँगा !
सुन्दर विरह गीत
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