शुक्रवार, 13 दिसंबर 2013

शेष

तुम नही हो 
तो भी तुम 
मेरे अंदर हो,
सब कुछ लेकर 
चले गये पर 
कुछ शेष रहा 
मेरे अंदर तुम्हारा 
उस शेष को 
न लेजा सके तुम 
क्योंकि वह शेष 
मेरा नहीं तुम्हारा था !


तुम्हारा होना या न होना 
नहीं महसूसता अब 
और यह शेष तुम्हारे 
अस्तित्व की
स्मृति नहीं मिटने देता है !

10 टिप्‍पणियां:

  1. उत्तम शब्द चयन और प्रस्तुति |
    आशा

    उत्तर देंहटाएं
  2. कल 15/12/2013 को आपकी पोस्ट का लिंक होगा http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर
    धन्यवाद!

    उत्तर देंहटाएं
  3. अस्तित्व क्या मिट सकेगा फिर भी ...
    ये माया है जो हो के भी नहीं होगी जैसे न होके भी है ...

    उत्तर देंहटाएं

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