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शेष

तुम नही हो 
तो भी तुम 
मेरे अंदर हो,
सब कुछ लेकर 
चले गये पर 
कुछ शेष रहा 
मेरे अंदर तुम्हारा 
उस शेष को 
न लेजा सके तुम 
क्योंकि वह शेष 
मेरा नहीं तुम्हारा था !


तुम्हारा होना या न होना 
नहीं महसूसता अब 
और यह शेष तुम्हारे 
अस्तित्व की
स्मृति नहीं मिटने देता है !

टिप्पणियाँ

  1. उत्तम शब्द चयन और प्रस्तुति |
    आशा

    उत्तर देंहटाएं
  2. कल 15/12/2013 को आपकी पोस्ट का लिंक होगा http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर
    धन्यवाद!

    उत्तर देंहटाएं
  3. अस्तित्व क्या मिट सकेगा फिर भी ...
    ये माया है जो हो के भी नहीं होगी जैसे न होके भी है ...

    उत्तर देंहटाएं
  4. bahut hi umda.... badhai..
    Please visit my Tech News Time Website, and share your views..Thank you

    उत्तर देंहटाएं

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छूटे हुए पल

कहीं कुछ छूट जाता है
जब न समेट पाने की वजह से नहीं,
बल्कि जानबूझकर
छोड़ दिया जाता है;
वह कचोटता रहता है उम्रभर।

छोड़े जाने की
कोई तो वजह रही होगी
या रही होगी मजबूरी,
जब हमने छोड़ दिया;
उस छूटे हुए पल को,
जिसे उम्र आज भी 
आकुल है पा लेने को।
काश.....................

यादें: जो रहती हैं ताउम्र ताज़ी।

जज़्बातों को
तुम समेट लेना,
मैं रख लूँगा
तुम्हारा मन। कि बिखरने न पाये
सबंधों की गठरी
और हाँ,
बोझ भी न बनने पाये।
बना रहे
जीवन में हल्कापन।। क्यों
समय से पहले
टूट जाती हैं
ये ख्वाहिशें, या
हो जाती हैं पैदा
नयी ख्वाहिशें,
पूरी होने पर।
क्या यही है जीवन।। तुम्हारी अँगुलियों में,
लिपटा हुआ
मेरे केशों का
बिखरा हुआ प्रेम।
समेट रहा हूँ
शामों को यादों में
भीग रहा है हमारा मन।।

इंतजार, इंतजार करो

तुम्हें याद होगा!
नीली रोशनी में
काँपते हुए  
नीले होंठों से कहा था-
"--------------------!" 

तुम्हें याद होगा! 
सावन की हल्की  फुहारों में
सकुचाते ह्रदय से कहा था- 
"------------------!" 

तुम्हें याद होगा! 
अंगीठी के पास
लाल सुर्ख चेहरे  से 
शर्माते हुए कहा था- 
"----------------!" 

और यह कहती हुई 
मुझे तनहाई में  
सन्नाटे देकर चली गयी- 
" इंतजार, इंतजार करो ! "