शुक्रवार, 14 अक्तूबर 2011

न ग़ज़ल समझे न गीत समझे

मेरे  हालात को  न  ग़ज़ल समझे 
न गीत समझे ,..........!

वख्त का था क्या तकाज़ा................2
न कोई जज़्बात समझे ,
न रीत समझे ............! 

ये गुज़रे कल के ज़ख्म हैं ................२
जिन्हें न हमदम समझे,
न मीत समझे.................!

दिल कि बाज़ी में हार गये...............२
फिर भी न हार हम समझे,
न जीत समझे ................!

बाद मुद्दत के आये अश्क.................२
इन्हें न फाजिल समझे,
न प्रीत समझे.............!

मेरे  हालात को  न  ग़ज़ल समझे
न गीत समझे ,..........!

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