सोमवार, 24 अक्तूबर 2011

"मुझे अब वे पराया कहने लगे"



बेरुखी इस कदर बढ़ गयी हमसे ,
मुझे अब वे पराया कहने लगे  !



बाद मुद्दत के ज़ुबां पे आयी,
जो ये शिकस्त की कहानी ,
फासले जो दरमयां करने लगे.........

बेरुखी इस कदर बढ़ गयी हमसे ,
मुझे अब वे पराया कहने लगे !




साथ निभाने की खाकर कसमे,
बात आयी जब रस्मे निबाह की
हाले मुफलिसी बयाँ करने लगे...........

बेरुखी इस कदर बढ़ गयी हमसे ,
मुझे अब वे पराया कहने लगे !



ज़िन्दगी जीना तो एक तकल्लुफ था 
तजुर्बे हवादिश का जब ज़िक्र हुआ ,
राह-ए-गुजर को जाया कहने लगे .............

बेरुखी इस कदर बढ़ गयी हमसे ,
मुझे अब वे पराया कहने लगे !

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