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आम आदमी: " Used To "


देश जल रहा है;
लोग झुलस रहे हैं,
सरकार और सरकारी 
महकमे भ्रष्टाचार में
संलिप्त हैं!
युवा आधुनिकता की 
चकाचौंध में भ्रमित है;
मीडिया मुद्दों में 
उलझा रही है!

शिक्षा व्यवसाय बन गयी 
धर्म लोगों को गुमराह 
कर रहा  है ;
प्रगति और विकास 
मानवता और प्रकृति का
पतन कर रहें हैं!
कोई भी न तो 
सुखी है औरन ही संतुष्ट!

एक ओर जहाँ समाज 
सोंच बदलने की बात करता है 
वहीँ दूसरी ओर वह सब 
वर्जनाएं तोड़ता जा रहा है ;
स्त्री को माँ, बहन और बेटी नहीं,
एक भोग की वस्तु बना दिया है! 
सिनेमा और साहित्य 
सब एक ही ले में 
बह रहें हैं!
और आम आदमी
समझता है इसमें 
उसकी क्या गलती है?
और उसका क्या लेना - देना है!
परन्तु जब तक 
आम आदमी "Used To" 
रहेगा तब तक 
न तो देश बदल सकता है
और न ही समाज!



अब पानी नाक तक 
आ चुका है और 
इअससे पहले सिर्फ तुम्हें और 
तुम्हें ही डुबा  दे;
खड़े हो जाओ और 
जहाँ जिस जगह से 
खड़े हो चल पड़ो
इन सब को बदलने के लिए,
क्योंकि जीवन अनंत है!

समाज सभ्यता और
देश को बचाने के लिए 
कोई मसीहा या ईश्वर
नहीं आएगा!
तुम जैसे आम आदमी
जब तक विरोध नहीं करेंगे 
तब तक यह 
"Used To" की बीमारी दूर न होगी 
और न ही ये 
system और सोंच बदलेगी !  

टिप्पणियाँ

  1. Aapki baat sahi hai ki aam admi ko kuchh karna hoga parantu jab vyavasthha chalaaney vaale log hee sahyog na dein to aam admi ke liye kadam uthhaana mushkil ho jaata hai. Dilli mein nirbhaya kaand ke baad jab bheed ne pradarshan kiya to unhein sahyog nahi balki aansun gas ke goley aur thandey paani ke tankers ki bauchhaar hee mileee.

    उत्तर देंहटाएं
  2. आपकी इस उत्कृष्ट पोस्ट की चर्चा बुधवार (13-02-13) के चर्चा मंच पर भी है | जरूर पधारें |
    सूचनार्थ |

    उत्तर देंहटाएं
  3. सही कहा....
    सब "Used To" हो गए हैं...
    कुछ बच गए हैं...
    वो भी हो जायेंगे.....!!

    उत्तर देंहटाएं
  4. जब आम आदमी हर अच्छे बुरे कार्यकलाप का used to हो जाएगा तो समाज में बदलाव कैसे आपाएगा |बदला तो वही ला सकता है |
    बढ़िया रचना |
    आशा

    उत्तर देंहटाएं
  5. सब-कुछ जानते हुए भी'हमें क्या करना'की मनोवृत्ति ,हर जगह अपने स्वयं को बचाने की आदत स्वभाव में बस गई है.इसे दूर करना बहुत आवश्यक है .

    उत्तर देंहटाएं
  6. सत्य और सार्थक रचना ...बहुत बहुत बढ़िया।

    उत्तर देंहटाएं
  7. सच कहा । आदी होजाना यानी बदलाव के रास्तों का बन्द होजाना ।

    उत्तर देंहटाएं

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छूटे हुए पल

कहीं कुछ छूट जाता है
जब न समेट पाने की वजह से नहीं,
बल्कि जानबूझकर
छोड़ दिया जाता है;
वह कचोटता रहता है उम्रभर।

छोड़े जाने की
कोई तो वजह रही होगी
या रही होगी मजबूरी,
जब हमने छोड़ दिया;
उस छूटे हुए पल को,
जिसे उम्र आज भी 
आकुल है पा लेने को।
काश.....................

यादें: जो रहती हैं ताउम्र ताज़ी।

जज़्बातों को
तुम समेट लेना,
मैं रख लूँगा
तुम्हारा मन। कि बिखरने न पाये
सबंधों की गठरी
और हाँ,
बोझ भी न बनने पाये।
बना रहे
जीवन में हल्कापन।। क्यों
समय से पहले
टूट जाती हैं
ये ख्वाहिशें, या
हो जाती हैं पैदा
नयी ख्वाहिशें,
पूरी होने पर।
क्या यही है जीवन।। तुम्हारी अँगुलियों में,
लिपटा हुआ
मेरे केशों का
बिखरा हुआ प्रेम।
समेट रहा हूँ
शामों को यादों में
भीग रहा है हमारा मन।।

तुम्हें तुम्हारा आफताब मुबारक

तुम्हें तुम्हारा आफताब मुबारक
हमको हमारा ये चराग मुबारक।

तुम क्या मुकम्मल करोगे मसलों को,
तुम्हें ही तुम्हारा जवाब मुबारक।

हो सकते थे और बेहतर हालात,
रख लो, तुम्हें तुम्हारा हिसाब मुबारक ।

सूरत बदलने से नहीं बदलती सीरत,
तुमको ये तुम्हारा नया हिजाब मुबारक।

खुद ही खुद तुम खुदा बन बैठे हो
तुम्हें यह तुम्हारा खिताब मुबारक।

तुम्हें तुम्हारा आफताब मुबारक
हमको हमारा ये चराग मुबारक।