गुरुवार, 24 अप्रैल 2014

स्त्री विमर्श

स्त्री
घर से निकल कर
फिर घर में
आ जाती है।


हर पल
वह व्यस्त है
पुरुष की
परवरिश में ।


और
पुरुष
निगल जाता है
स्त्री का
पूरा वजूद  ।


क्या 
कहीं से कोई
परिवर्तन की
आशा दिखाई देती है  !!


शायद
अब कुछ स्त्रियाँ
पुरुष बनने की
प्रक्रिया से गुजरने
की सोच रहीं हैं  ।।


पर
पुरुष ने
षड्यंत्रों की
परिभाषाओं
को बदल दिया है।
एक नया जाल
किया है तैयार
" स्त्री विमर्श "।

4 टिप्‍पणियां:

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