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इस धरती की आधी दुनिया

रोटी के
जरा सी
जल जाने भर से
जला दी जाती हैं
स्त्रियाँ।


बेटों के
जन्म न देने भर से
मार दी जाती हैं,
कोख में ही
बेटियाँ  ।।


और वर्जित है
जिन्हें
प्रेम करना  ।।


ये स्त्रियाँ
इस समाज का
आधा हिस्सा हैं,
आधी दुनिया हैं
इस धरती की।।



जिनका  भूगोल तो
बना दिया गया है,
पर गणितीय सिद्धांत
अभी भी
सहूलियत के अनुसार
बदल लेते हैं
ये गणिताचार्य ।।

टिप्पणियाँ

  1. आपकी लिखी रचना रविवार 27 अप्रेल 2014 को लिंक की जाएगी...............
    http://nayi-purani-halchal.blogspot.in आप भी आइएगा ....धन्यवाद!

    उत्तर देंहटाएं
  2. बहुत सुन्दर प्रस्तुति।
    --
    आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल शनिवार (26-04-2014) को ""मन की बात" (चर्चा मंच-1594) (चर्चा मंच-1587) पर भी होगी!
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

    उत्तर देंहटाएं
  3. गहरी अभिव्यक्ति..... हमारे ही परिवेश का कटु सत्य .....

    उत्तर देंहटाएं
  4. ऐसे सच जो दिल दहला दें,
    पर युगों से यही होता आ रहा है . सृष्टि के सबसे श्रेष्ठ और समर्थ मानी जाने वाली जाति की यही असलियत है !

    उत्तर देंहटाएं
  5. अति सुन्दर...खूबसूरत कथ्य...बहुत खूब...

    उत्तर देंहटाएं
  6. बहुत प्रभावी ... कठोर सत्य ... सदियों से चला आ रहा कडुवा सच ...

    उत्तर देंहटाएं
  7. जिनका भूगोल तो
    बना दिया गया है,
    पर गणितीय सिद्धांत
    अभी भी
    सहूलियत के अनुसार
    बदल लेते हैं
    ये गणिताचार्य ।।

    बहुत ही शानदार..स्त्रियों के प्रति किये जाने वाले पितृसत्तात्मक व्यवहार का उत्तम चित्रण।।

    उत्तर देंहटाएं
  8. इस टिप्पणी को एक ब्लॉग व्यवस्थापक द्वारा हटा दिया गया है.

    उत्तर देंहटाएं
  9. Truth of our society ,
    Bw to all my seniors here , please have a look on my newly created blog ,, Just want to do something great in hindi and want suggestions from all you respected persons , So this is the link for my first poem in hindi -<a href="http://hindishortstoriesandpoems.blogspot.in/2014/05/manjil-ki-talaash-mein.html>Home</a>

    उत्तर देंहटाएं
  10. ये स्त्रियाँ
    इस समाज का
    आधा हिस्सा हैं,
    आधी दुनिया हैं
    इस धरती की।।
    लेकिन स्त्री होने का दर्द झेल रही है आज स्त्री

    उत्तर देंहटाएं

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छूटे हुए पल

कहीं कुछ छूट जाता है
जब न समेट पाने की वजह से नहीं,
बल्कि जानबूझकर
छोड़ दिया जाता है;
वह कचोटता रहता है उम्रभर।

छोड़े जाने की
कोई तो वजह रही होगी
या रही होगी मजबूरी,
जब हमने छोड़ दिया;
उस छूटे हुए पल को,
जिसे उम्र आज भी 
आकुल है पा लेने को।
काश.....................

यादें: जो रहती हैं ताउम्र ताज़ी।

जज़्बातों को
तुम समेट लेना,
मैं रख लूँगा
तुम्हारा मन। कि बिखरने न पाये
सबंधों की गठरी
और हाँ,
बोझ भी न बनने पाये।
बना रहे
जीवन में हल्कापन।। क्यों
समय से पहले
टूट जाती हैं
ये ख्वाहिशें, या
हो जाती हैं पैदा
नयी ख्वाहिशें,
पूरी होने पर।
क्या यही है जीवन।। तुम्हारी अँगुलियों में,
लिपटा हुआ
मेरे केशों का
बिखरा हुआ प्रेम।
समेट रहा हूँ
शामों को यादों में
भीग रहा है हमारा मन।।

तुम्हें तुम्हारा आफताब मुबारक

तुम्हें तुम्हारा आफताब मुबारक
हमको हमारा ये चराग मुबारक।

तुम क्या मुकम्मल करोगे मसलों को,
तुम्हें ही तुम्हारा जवाब मुबारक।

हो सकते थे और बेहतर हालात,
रख लो, तुम्हें तुम्हारा हिसाब मुबारक ।

सूरत बदलने से नहीं बदलती सीरत,
तुमको ये तुम्हारा नया हिजाब मुबारक।

खुद ही खुद तुम खुदा बन बैठे हो
तुम्हें यह तुम्हारा खिताब मुबारक।

तुम्हें तुम्हारा आफताब मुबारक
हमको हमारा ये चराग मुबारक।