बुधवार, 30 मई 2012

हाईकु

१- अंतर्मन में 
   कैसा है व्योमोहन,
   व्यग्र जीवन !


२- होकर रिक्त 
   क्यों बना त्यक्त,
   बन अच्युत !


३- पाणि कृपाण
    कर ग्रहण, 
   हेतु तू प्रहरण !


४-  कर  मनन ,
     व्यर्थ न हो जीवन !
     तज नन्दन !

५- है प्रभंजन 
    क्रूर काल भंजन 
    हो प्रद्योतन!

1 टिप्पणी:

  1. चल मगन
    छगन गगन-गगन
    पंछी छज्जे-छज्जे...
    बहुत ही बढियां प्रस्तुति...

    उत्तर देंहटाएं

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