गुरुवार, 10 मई 2012

महफ़िल में आज उनकी

महफ़िल में आज उनकी,
कुछ यूँ अंजाम होना है !
जैसे कत्ल मेरा सर-ए-आम होना है!
महफ़िल-ए-रौनक में बस
परवाने को बदनाम होना है !
महफ़िल में आज उनकी.................!
क़त्ल और कातिल दोनों में
मेरा ही एक नाम होना है !
महफ़िल में आज उनकी.................!
अदाएं ही कुछ ऐसी हैं, यार की,
यही हश्र-ए- अंजाम होना है !
महफ़िल में आज उनकी.................!


1 टिप्पणी:

  1. कल 012/05/2012 को आपकी यह पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .

    धन्यवाद!

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