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श्रमिक !

लफ्ज दर लफ्ज 
जिन्दगी जीता 
कभी धरती के सीने को 
फाड कर उगाता जीवन;

पहाडों को फोडकर;
निकालता नदियाँ ।

जिसकी पसीने की 
हर एक बूंद दर्शन का
ग्रन्थ रचती ।

उसके जीवन का
हर गुजरता क्षण
ऋचाएं रचता ;


हर सभ्यता का निर्माता
तिरष्कृत और बहिष्कृत
ही रहा सदियों से।

टिप्पणियाँ

  1. श्रमिक के जीवन पर विचारणीय कविता-पाठ। कृपया(हर सभ्‍यता) या (सभ्‍यताओं) में से एक का चुनाव करें।

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  2. बहुत बढ़िया...
    विचारणीय भाव.....

    अनु

    उत्तर देंहटाएं
  3. ऋचाएं रचता जीवन जो प्रणम्य है वही रहता है तिरस्कृत!
    यही तो विडम्बना है!

    सुन्दर रचना!

    उत्तर देंहटाएं
  4. हाड तोड़ मेहनत के बाद भी वंचित सम्मान से , अर्थ से !

    उत्तर देंहटाएं
  5. बहुत सुन्दर. जिनका वास्तव में पसीना में बहता है वो गुमनामी में ही रहते हैं . बारीकी से गौर करने हर क्षेत्र में कुछ ना कुछ ऐसा दिखेगा.

    उत्तर देंहटाएं
  6. श्रामिक के जीवन की गाथा ... बहुत ही प्रभावी, कम शब्दों में पूरा ग्रन्थ लिख दिया .... नमन है अनाम श्रमिक को ...

    उत्तर देंहटाएं
  7. जिसकी पसीने की
    हर एक बूंद दर्शन का
    ग्रन्थ रचती ।

    उसके जीवन का
    हर गुजरता क्षण
    ऋचाएं रचता ;

    हर सभ्यता का निर्माता
    तिरष्कृत और बहिष्कृत
    ही रहा सदियों से।
    बहुत सार्थक शब्द संयोजन

    उत्तर देंहटाएं

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छूटे हुए पल

कहीं कुछ छूट जाता है
जब न समेट पाने की वजह से नहीं,
बल्कि जानबूझकर
छोड़ दिया जाता है;
वह कचोटता रहता है उम्रभर।

छोड़े जाने की
कोई तो वजह रही होगी
या रही होगी मजबूरी,
जब हमने छोड़ दिया;
उस छूटे हुए पल को,
जिसे उम्र आज भी 
आकुल है पा लेने को।
काश.....................

यादें: जो रहती हैं ताउम्र ताज़ी।

जज़्बातों को
तुम समेट लेना,
मैं रख लूँगा
तुम्हारा मन। कि बिखरने न पाये
सबंधों की गठरी
और हाँ,
बोझ भी न बनने पाये।
बना रहे
जीवन में हल्कापन।। क्यों
समय से पहले
टूट जाती हैं
ये ख्वाहिशें, या
हो जाती हैं पैदा
नयी ख्वाहिशें,
पूरी होने पर।
क्या यही है जीवन।। तुम्हारी अँगुलियों में,
लिपटा हुआ
मेरे केशों का
बिखरा हुआ प्रेम।
समेट रहा हूँ
शामों को यादों में
भीग रहा है हमारा मन।।

तुम्हें तुम्हारा आफताब मुबारक

तुम्हें तुम्हारा आफताब मुबारक
हमको हमारा ये चराग मुबारक।

तुम क्या मुकम्मल करोगे मसलों को,
तुम्हें ही तुम्हारा जवाब मुबारक।

हो सकते थे और बेहतर हालात,
रख लो, तुम्हें तुम्हारा हिसाब मुबारक ।

सूरत बदलने से नहीं बदलती सीरत,
तुमको ये तुम्हारा नया हिजाब मुबारक।

खुद ही खुद तुम खुदा बन बैठे हो
तुम्हें यह तुम्हारा खिताब मुबारक।

तुम्हें तुम्हारा आफताब मुबारक
हमको हमारा ये चराग मुबारक।