अन्तर्गगन: किसे ढूंढते हैं, ये सूने नयन ? सितंबर 06, 2012 अन्तर्गगन: किसे ढूंढते हैं, ये सूने नयन ?: किसे ढूंढते हैं, ये सूने नयन ? स्मृतियों में क्यों, हो रहे विह्वल , किस हेतु उन्मीलित, हैं ये अविरल / स्पंदन हीन हृदय , औ नीरद अयन किसे ढूं... शेयर करें लिंक पाएं Facebook X Pinterest ईमेल दूसरे ऐप शेयर करें लिंक पाएं Facebook X Pinterest ईमेल दूसरे ऐप टिप्पणियाँ ANULATA RAJ NAIRगुरुवार, 6 सितंबर 2012 को 2:33:00 pm IST बजेवाह..बहुत सुन्दर रचना...अनु जवाब देंहटाएंउत्तरजवाब देंटिप्पणी जोड़ेंज़्यादा लोड करें... एक टिप्पणी भेजें
वाह..
जवाब देंहटाएंबहुत सुन्दर रचना...
अनु