मंगलवार, 6 मार्च 2012

जीवन पहेली

जीता चला जाता हूँ
जिन्दगी जो मिलती
जिस ढंग से यहाँ ,

लोग समझते हैं
कितनी आसान है
जिन्दगी इंसान की ,

पर सोंचते हैं जब
वो अपने जीवन के लिए ,
हो जाती राहें विह्वर !

आह्लाद और व्यथा के
पाश से होकर पाशित ,
भ्रमित व्योमोहन में !

पर मिल जाता जिन्हें
लक्ष्य उनके जीवन का
कृतार्थ हो जाते वे धन्य !

  

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