गुरुवार, 29 मार्च 2012

अधूरे समाज

प्यार तुम्हें भी था
प्यार हमें भी था,
जीना हमें भी था
जीना तुम्हें भी था !

नियमों पर चलना पड़ा
समाज से बचना पड़ा
हमें भी यहीं रहना था
तुम्हें भी यहीं रहना था

भले ही हम अधूरे हैं
पर समाज तो बचे हैं
और इन्हें बचाना ही है
समाज तो बनाना ही है !


नियमों को न तुम तोडना
नियमों को न हम तोड़ेंगे ;
पुराने रास्तों को न छोड़ना
न ही हम इन को छोड़ेंगे!


क्योंकि आने वाले समय में
कहीं समाज बदनाम न हो जाय!
प्यार भला कोई जिन्दगी है
जो इसके बिना न जिया जाय !

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