शुक्रवार, 23 मार्च 2012

वर्जित फल !

इश्क
जिसे कहते हैं
होता है रूहानी ;
पर
जिस्मों के
मिलन से ही,
हो पाता है
पूर्ण और यथार्थ !!

जिस्म  में
सुलगती रूहों
के लिए क्यों
होता है जरूरी
जिस्मों का मिलन ;

फिर भी कहते
नापाक होता है
जिस्मानी  इश्क !
जबकि
कायनात की
है सबसे अपरिहार्य
जरूरत !!

होता गर
रूहानी इश्क
मुत्मईन रूहों के
मिलन का पर्याय ;
तो क्यों छोडनी
पडती जन्नत
खाने पर
वर्जित फल !
और क्यों होता
आगाज इस
कायनात का !    

2 टिप्‍पणियां:

  1. शानदार कविता
    उच्चारण मे कुछ कमियां हैं.... जिस्मानी को जिश्मानी लिखा गया है
    शायद अगली बार सुधर कर मिले
    अन्तिम पंक्तिया मन मोह गई

    उत्तर देंहटाएं
  2. यशोदा जी त्रुटि हेतु ध्यानाकर्षित करने हेतु बहुत बुत धन्यवाद !

    उत्तर देंहटाएं

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