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दफन रहने दो गुजरे कल को..........






दफन रहने दो गुजरे कल को;
भरने में जख्म एक जमाना लगता है !

सुनते-सुनते एक मुद्दत हुयी,
उसका नाम तो अब एक फसाना लगता है!
अरसे बाद जो आईना देखा,
खुद का ही चेहरा अब अनजाना लगता है!

चंद सांसों का लिहाज़ भर है,
मौत का आना भी एक बहाना लगता है! 

दफन रहने दो गुजरे कल को;
भरने में जख्म एक जमाना लगता है !

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