न जाने किस ख्याल से बेख्याली जायेगी; जाते - जाते ये शाम भी खाली जायेगी। गर उनके आने की उम्मीद बची है अब भी, फिर और कुछ दिन मौत भी टाली जायेगी। कुछ तो मजाज बदलने दो मौसमों का अभी, पुरजोर हसरत भी दिल की निकाली जायेगी। कनारा तो कर लें इस जहाँ से ओ जानेजां, फिर भी ये जुस्तजू हमसे न टाली जायेगी । कि ख्वाहिश है तुमसे उम्र भर की साथ रहने को, दिये न जल पाये तो फिर ये दिवाली जायेगी।
आपके विचारों का प्रतिबिम्ब !

क्या ज़ख्म कभी भरते हैं ?
जवाब देंहटाएंमन को छूते शब्द ... बेहतरीन प्रस्तुति।
जवाब देंहटाएंबहुत खूब .... सही है जख्म भरने में न जाने कितना समय लग जाता है
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जवाब देंहटाएंसुन्दर शेली सुन्दर भावनाए क्या कहे शब्द नही है तारीफ के लिए....!!!
sahi....jakham bharny main jamana lagta hai............
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