रविवार, 25 सितंबर 2011

"?" क्यूं हुआ मेरा जन्म,

क्यूं हुआ मेरा जन्म,
क्या था मेरा अभिशाप,
किस कर्म फल का यह प्रायश्चित ,
जिसे मैं घुट-घुट कर ,
मर-मर कर जी रही हूँ ??

घर -बाहर हर जगह ,
यह महा विभेद!
'नारी उत्थान '
अधिकारों की समानता ,
कितना मृदु -तीक्ष्ण व्यंग्य ,
नारी के द्वारा ही ,
नारी को अभिशापित
करने की क्रूर प्रथा!!

धन्य है वह (नारी)
जिसे मार दिया गया,
जन्म से पहले ही ,
जिसे उबार दिया गया !

रचा गया फिर एक
न्य सिद्धांत
भ्रूण हत्या को ,
संवैधानिक पाप
करार दिया गया !

वाह ऱी सभ्यता!
तू और मैं
दोनों में कितनी समानता है ?
दोनों की हत्याएं
हो रही हैं ,
और मूक होकर
हम रो रही हैं ,
क्योंकि हमारा "जेंडर"
एक ही तो है!

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