सोमवार, 20 अगस्त 2012

व्योमोहन: जीवन का

दूर तक;
न अत्न का प्रकाश
न राग की किरण!

पूर्ण भू पर
निशा का प्रभास;
न आशा की किरण!

व्योमोहित
गति मंद
व्यथित अंतर्मन!

आक्रांत उर
मति कुंद,
श्रांत विच्छिप्त तन !

न भविष्य का 
पथ आलोकित;
न जीवन का आधार!

न उर में उमंग;
अपुल्कित मन,
न कोई कर्म आभार!

न कोई लक्ष्य;
जीवन में न विश्वास!
अर्थ हीन श्रम;
निष्प्राण- निः श्वास !

1 टिप्पणी:

  1. न कोई लक्ष्य;
    जीवन में न विश्वास!
    अर्थ हीन श्रम;
    निष्प्राण- निः श्वास !

    बहुत खूब सर!

    सादर

    उत्तर देंहटाएं

अन्य पठनीय रचनाएँ!

Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...