गुरुवार, 16 अगस्त 2012

आज फूलों को ही आंधियों से टकराना होगा!

आज फूलों को ही आंधियों से टकराना होगा!
          लाख तूफाँ कोशिश करले;
          विनाश की हदें पार कर ले,
          बवंडर कितना ही तीव्र हो;
आज कश्ती को भीच भंवर पार जाना होगा !
आज फूलों को ही आंधियों से टकराना होगा!

          सदियाँ गुजर गईं विध्वंस में;
          खिंच गईं तलवारें वंश-वंश में,
           कर्म गीता का पढकर पाठ;
अर्जुन को 'भारत' का इतिहास दोहराना होगा !
आज फूलों को ही आंधियों से टकराना होगा!

         एक बार फिर आग दो मशाल को;
         क्रांति पर्व में चढ़ा दो निज भाल को,
         परिवर्तन है चिर नियम प्रकृति का;
सृजन के पथ पर वीरों को कदम बढ़ाना होगा !
आज फूलों को ही आंधियों से टकराना होगा! 

8 टिप्‍पणियां:

  1. कल 19/08/2012 को आपकी यह बेहतरीन पोस्ट http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
    धन्यवाद!

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  2. सच कहा ....जब तक कमजोर अपनी ताकत नहीं पहचानेगा .....कुछ नहीं होगा .....बहुत सुन्दर

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  3. बहुत बेहतरीन
    प्रेरित करती रचना....
    :-)

    उत्तर देंहटाएं

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