शनिवार, 20 अक्तूबर 2012

टूट कर जो न बिखरे वो शख्सियत है,


टूट कर जो न बिखरे वो शख्सियत है,
वरना जमाने में कमी नहीं आदमी की !

गिर कर जो फिर सम्भल जाय ठोकरों से,
देता है जमाना मिसाल उस आदमी की !

हर एक गम में जो मुस्कराता रहे सदा,
पूरी होती तमन्ना-ए-जिन्दगी उस आदमी की !

हालतों से लड़ जीत लेता है जो जंग-ए- जिन्दगी,
आसाँ हो जाती है राह -ए-मंजिल उस आदमी की !

जो बनता है मुकद्दर मिटाकर खुद की हस्ती को,
और भी संवर जाती है जिन्दगी उस आदमी की !

टूट कर जो न बिखरे वो शख्सियत  है,
वरना जमाने में कमी नहीं आदमी की !

11 टिप्‍पणियां:

  1. सच है आदमी हर कठिनाई से मुक़ाबला कर सकता है ....

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  2. हर दर्द सीने में छिपा लेते है ,हर शख्स को अपना बना लेते हैं ,शानदार पोस्ट ,बधाई |आपके ब्लॉग पर आना सार्थक हुआ|

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  3. जीवन के विविध प्रसंगों को समेटे आपकी रचना सार्थक है ...!

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  4. वाह...
    शानदार अभिव्यक्ति...!!

    कुछ ऐसे भी इंसान होते हैं...
    दर्द सीने में छुपा लेते हैं...!

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  5. बढ़िया....
    सार्थक भाव लिए गज़ल...
    अनु

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  6. आपकी यह बेहतरीन रचना बुधवार 24/10/2012 को http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर लिंक की जाएगी. कृपया अवलोकन करे एवं आपके सुझावों को अंकित करें, लिंक में आपका स्वागत है . धन्यवाद!

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  7. बहुत सुन्दर भाव लिए सार्थक रचना...
    बहुत खूब....
    :-)

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  8. सच बात है ...
    बढ़िया सम्प्रेषण!
    शुभकामनायें आपको !

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