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कर्मनाशाएं!

सागर को कर समर्पित सर्वस्व,
सूख जाती हैं निस्त्राएँ;
लेकिन इनका अस्तित्व,
बनाये रखता है ससागर को;
पर कभी-कभी कुछ निस्त्राएँ;
जो होती हैं पवित्र और निर्मल
बन जाती हैं ,
छोटी- बड़ी कर्मनाशाएं!
जिनकी हारें कभी-कभी
हो जाया करती हैं असम्भव!
***************************
निस्त्राएँ=नदियाँ !

टिप्पणियाँ

  1. आपकी उम्दा पोस्ट बुधवार (31-10-12) को चर्चा मंच पर | जरूर पधारें | सूचनार्थ |

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  2. सुन्दर भावाभिव्यक्ति .धीरेन्द्र जी निस्त्राएँ शब्द शब्दकोष भी देखा नहीं मिला इसका अर्थ बताने का कष्ट करें तो हमारे जैसे पाठकों को सुविधा रहेगी.आभार

    उत्तर देंहटाएं
  3. सागर की गरिमा भाव पूर्ण पोस्ट बधाई

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छूटे हुए पल

कहीं कुछ छूट जाता है
जब न समेट पाने की वजह से नहीं,
बल्कि जानबूझकर
छोड़ दिया जाता है;
वह कचोटता रहता है उम्रभर।

छोड़े जाने की
कोई तो वजह रही होगी
या रही होगी मजबूरी,
जब हमने छोड़ दिया;
उस छूटे हुए पल को,
जिसे उम्र आज भी 
आकुल है पा लेने को।
काश.....................

यादें: जो रहती हैं ताउम्र ताज़ी।

जज़्बातों को
तुम समेट लेना,
मैं रख लूँगा
तुम्हारा मन। कि बिखरने न पाये
सबंधों की गठरी
और हाँ,
बोझ भी न बनने पाये।
बना रहे
जीवन में हल्कापन।। क्यों
समय से पहले
टूट जाती हैं
ये ख्वाहिशें, या
हो जाती हैं पैदा
नयी ख्वाहिशें,
पूरी होने पर।
क्या यही है जीवन।। तुम्हारी अँगुलियों में,
लिपटा हुआ
मेरे केशों का
बिखरा हुआ प्रेम।
समेट रहा हूँ
शामों को यादों में
भीग रहा है हमारा मन।।

इंतजार, इंतजार करो

तुम्हें याद होगा!
नीली रोशनी में
काँपते हुए  
नीले होंठों से कहा था-
"--------------------!" 

तुम्हें याद होगा! 
सावन की हल्की  फुहारों में
सकुचाते ह्रदय से कहा था- 
"------------------!" 

तुम्हें याद होगा! 
अंगीठी के पास
लाल सुर्ख चेहरे  से 
शर्माते हुए कहा था- 
"----------------!" 

और यह कहती हुई 
मुझे तनहाई में  
सन्नाटे देकर चली गयी- 
" इंतजार, इंतजार करो ! "