सोमवार, 29 अक्तूबर 2012

कर्मनाशाएं!

सागर को कर समर्पित सर्वस्व,
सूख जाती हैं निस्त्राएँ;
लेकिन इनका अस्तित्व,
बनाये रखता है ससागर को;
पर कभी-कभी कुछ निस्त्राएँ;
जो होती हैं पवित्र और निर्मल
बन जाती हैं ,
छोटी- बड़ी कर्मनाशाएं!
जिनकी हारें कभी-कभी
हो जाया करती हैं असम्भव!
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निस्त्राएँ=नदियाँ !

9 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी उम्दा पोस्ट बुधवार (31-10-12) को चर्चा मंच पर | जरूर पधारें | सूचनार्थ |

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  2. सुन्दर भावाभिव्यक्ति .धीरेन्द्र जी निस्त्राएँ शब्द शब्दकोष भी देखा नहीं मिला इसका अर्थ बताने का कष्ट करें तो हमारे जैसे पाठकों को सुविधा रहेगी.आभार

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  3. सागर की गरिमा भाव पूर्ण पोस्ट बधाई

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