शुक्रवार, 11 जनवरी 2013

वक्त कुछ इस तरह बुरा है,


वक्त कुछ इस तरह बुरा है,
अपनों को अपना कहना बुरा है!


हर वो हवा जो बहारो से गुजरी,
हवा का अब ठहरना बुरा है !

धडकनों को होंगी दिक्कतें बहुत,
दिल में किसी के रहना बुरा है !



खुद को समझ न पाया कभी ,
किसी और को समझना बुरा है !


दोस्ती-दुश्मनी की रंज क्या कहें-
दोनों में ही जीना -मरना बुरा है!


वक्त कुछ इस तरह बुरा है,
अपनों को अपना कहना बुरा है!
   ?

4 टिप्‍पणियां:

अन्य पठनीय रचनाएँ!

Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...