सोमवार, 28 जनवरी 2013

जिन्दगी है एक धूप छाँव सी;



जिन्दगी है एक धूप छाँव सी;
पल-पल बदले शहर गाँव सी!

कभी मिल जाते मीठे पल,
कभी याद आते बीते कल;
हंसाती , रुलाती, गुदगुदाती;
कभी दुखती है जिन्दगी घाव सी;
जिन्दगी है एक धूप छाँव सी;

कभी अपने भी पराये हो जाते,
कभी पराये भी अपने हो जाते!
जश्न मानती है जिन्दगी कभी;
तो कभी डगमगाती है नाव सी;
जिन्दगी है एक धूप छाँव सी;


अनजानी राहों से है गुजरती ;
तो कभी ठहराव लाती जिन्दगी!
जिन्दगी के हैं कई रंग-रूप:
है ये जिन्दगी एक बहाव सी ;
जिन्दगी है एक धूप छाँव सी;


कभी सुबह की लाली है तो
कभी लगती है  उदास शाम सी;
चलते-चलते चली जाती है;
यह  तो बस है एक पड़ाव सी,
जिन्दगी है एक धूप छाँव सी;
पल-पल बदले शहर गाँव सी!
-- 
                                              ?

10 टिप्‍पणियां:

  1. बिलकुल सही...जिन्दगी है एक धूप छाँव सी

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  2. आपकी इस उत्कृष्ट पोस्ट की चर्चा बुधवार (30-01-13) के चर्चा मंच पर भी है | जरूर पधारें |
    सूचनार्थ |

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  3. बहुत प्यारी रचना है |उम्दा अभिव्यक्ति |
    आशा

    उत्तर देंहटाएं
  4. ज़िंदगी


    ज़िंदगी
    चाक सी
    जो चलते
    चलते
    होती जाती
    छोटी और
    छोटी अन्त
    में हमारी
    पकड़ में
    नहीं रह जाती www.aloktiwari.org

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