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जिन्दगी है एक धूप छाँव सी;



जिन्दगी है एक धूप छाँव सी;
पल-पल बदले शहर गाँव सी!

कभी मिल जाते मीठे पल,
कभी याद आते बीते कल;
हंसाती , रुलाती, गुदगुदाती;
कभी दुखती है जिन्दगी घाव सी;
जिन्दगी है एक धूप छाँव सी;

कभी अपने भी पराये हो जाते,
कभी पराये भी अपने हो जाते!
जश्न मानती है जिन्दगी कभी;
तो कभी डगमगाती है नाव सी;
जिन्दगी है एक धूप छाँव सी;


अनजानी राहों से है गुजरती ;
तो कभी ठहराव लाती जिन्दगी!
जिन्दगी के हैं कई रंग-रूप:
है ये जिन्दगी एक बहाव सी ;
जिन्दगी है एक धूप छाँव सी;


कभी सुबह की लाली है तो
कभी लगती है  उदास शाम सी;
चलते-चलते चली जाती है;
यह  तो बस है एक पड़ाव सी,
जिन्दगी है एक धूप छाँव सी;
पल-पल बदले शहर गाँव सी!
-- 
                                              ?

टिप्पणियाँ

  1. बिलकुल सही...जिन्दगी है एक धूप छाँव सी

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  2. आपकी इस उत्कृष्ट पोस्ट की चर्चा बुधवार (30-01-13) के चर्चा मंच पर भी है | जरूर पधारें |
    सूचनार्थ |

    उत्तर देंहटाएं
  3. बहुत प्यारी रचना है |उम्दा अभिव्यक्ति |
    आशा

    उत्तर देंहटाएं
  4. ज़िंदगी


    ज़िंदगी
    चाक सी
    जो चलते
    चलते
    होती जाती
    छोटी और
    छोटी अन्त
    में हमारी
    पकड़ में
    नहीं रह जाती www.aloktiwari.org

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छूटे हुए पल

कहीं कुछ छूट जाता है
जब न समेट पाने की वजह से नहीं,
बल्कि जानबूझकर
छोड़ दिया जाता है;
वह कचोटता रहता है उम्रभर।

छोड़े जाने की
कोई तो वजह रही होगी
या रही होगी मजबूरी,
जब हमने छोड़ दिया;
उस छूटे हुए पल को,
जिसे उम्र आज भी 
आकुल है पा लेने को।
काश.....................

यादें: जो रहती हैं ताउम्र ताज़ी।

जज़्बातों को
तुम समेट लेना,
मैं रख लूँगा
तुम्हारा मन। कि बिखरने न पाये
सबंधों की गठरी
और हाँ,
बोझ भी न बनने पाये।
बना रहे
जीवन में हल्कापन।। क्यों
समय से पहले
टूट जाती हैं
ये ख्वाहिशें, या
हो जाती हैं पैदा
नयी ख्वाहिशें,
पूरी होने पर।
क्या यही है जीवन।। तुम्हारी अँगुलियों में,
लिपटा हुआ
मेरे केशों का
बिखरा हुआ प्रेम।
समेट रहा हूँ
शामों को यादों में
भीग रहा है हमारा मन।।

तुम्हें तुम्हारा आफताब मुबारक

तुम्हें तुम्हारा आफताब मुबारक
हमको हमारा ये चराग मुबारक।

तुम क्या मुकम्मल करोगे मसलों को,
तुम्हें ही तुम्हारा जवाब मुबारक।

हो सकते थे और बेहतर हालात,
रख लो, तुम्हें तुम्हारा हिसाब मुबारक ।

सूरत बदलने से नहीं बदलती सीरत,
तुमको ये तुम्हारा नया हिजाब मुबारक।

खुद ही खुद तुम खुदा बन बैठे हो
तुम्हें यह तुम्हारा खिताब मुबारक।

तुम्हें तुम्हारा आफताब मुबारक
हमको हमारा ये चराग मुबारक।