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अंतिम पृष्ठ


कहानी उस रोज की 
अब तक पढ़ता आ रहा हूँ;
हर दिन एक नया पन्ना,
मेरी आँखों में फड़फडाता है !

हर शाम मैं सोंचता हूँ 
ये अंतिम पृष्ठ है 
उस कहानी का,
पर रात आते ही
एक नये पन्ने की 
उद्विग्नता  पूर्ण 
शुरुवात हो जाती है !

मैं फिर से 
पढने लग जाता हूँ 
उस अधूरी कहानी को 
इस जिज्ञासा से 
शायद आज यह 
अंतिम पृष्ठ होगा!
  ?

टिप्पणियाँ

  1. सुन्दर प्रस्तुति बहुत ही अच्छा लिखा आपने .बहुत ही सुन्दर रचना.बहुत बधाई आपको

    उत्तर देंहटाएं
  2. ये कहानी ऐसी ही हर रोज एक नई जिज्ञासा लेकर आ जाती है, कोई नहीं जनता इसका अंतिम पृष्ठ कौन सा होगा.. गहन अभिव्यक्ति... आभार

    उत्तर देंहटाएं
  3. हर रोज नया पृष्ठ नई कहानी,,,लाजबाब अभिव्यक्ति,,बधाई

    recent post: वह सुनयना थी,

    उत्तर देंहटाएं

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छूटे हुए पल

कहीं कुछ छूट जाता है
जब न समेट पाने की वजह से नहीं,
बल्कि जानबूझकर
छोड़ दिया जाता है;
वह कचोटता रहता है उम्रभर।

छोड़े जाने की
कोई तो वजह रही होगी
या रही होगी मजबूरी,
जब हमने छोड़ दिया;
उस छूटे हुए पल को,
जिसे उम्र आज भी 
आकुल है पा लेने को।
काश.....................

यादें: जो रहती हैं ताउम्र ताज़ी।

जज़्बातों को
तुम समेट लेना,
मैं रख लूँगा
तुम्हारा मन। कि बिखरने न पाये
सबंधों की गठरी
और हाँ,
बोझ भी न बनने पाये।
बना रहे
जीवन में हल्कापन।। क्यों
समय से पहले
टूट जाती हैं
ये ख्वाहिशें, या
हो जाती हैं पैदा
नयी ख्वाहिशें,
पूरी होने पर।
क्या यही है जीवन।। तुम्हारी अँगुलियों में,
लिपटा हुआ
मेरे केशों का
बिखरा हुआ प्रेम।
समेट रहा हूँ
शामों को यादों में
भीग रहा है हमारा मन।।

तुम्हें तुम्हारा आफताब मुबारक

तुम्हें तुम्हारा आफताब मुबारक
हमको हमारा ये चराग मुबारक।

तुम क्या मुकम्मल करोगे मसलों को,
तुम्हें ही तुम्हारा जवाब मुबारक।

हो सकते थे और बेहतर हालात,
रख लो, तुम्हें तुम्हारा हिसाब मुबारक ।

सूरत बदलने से नहीं बदलती सीरत,
तुमको ये तुम्हारा नया हिजाब मुबारक।

खुद ही खुद तुम खुदा बन बैठे हो
तुम्हें यह तुम्हारा खिताब मुबारक।

तुम्हें तुम्हारा आफताब मुबारक
हमको हमारा ये चराग मुबारक।