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रेत पर बिखरा प्रेम!


मुझे मालूम है
नहीं हो सकती तुम मेरी !

उम्र भर यादों के सहारे,
जीने का असफल प्रयास 
करोगी तुम!


लेकिन घर, समाज और 
झूठे सिद्धांतों का 
प्रतिरोध करने की 
हजार कोशिशों बाद भी 
हिम्मत न जुटा पाओगी !

और मै
तुम्हारा इन्तजार 
करते-करते,
आखिरी सांस को 
पीछे छोड़ने में
लगा हूँ !

यह प्रेम 
कितना क्रूर है
जो  दो जिंदगियों को 
किश्तों में जीने को 
मजबूर कर देता है!

या शायद:
मैं तुम्हारे मिथ्या 
प्रेम को यथार्थ 
मान कर सब कुछ
समर्पित करता चला गया!
जिसे तुमने एक 
रेत के घरोंदे सा 
मानकर स्मृतियों से
मिटा दिया !

   ?
-- 

टिप्पणियाँ

  1. या शायद:
    मैं तुम्हारे मिथ्या
    प्रेम को यथार्थ
    मान कर सब कुछ
    समर्पित करता चला गया!
    जिसे तुमने एक
    रेत के घरोंदे सा
    मानकर स्मृतियों से
    मिटा दिया !
    yah ek soch ho sakta hai
    New post कृष्ण तुम मोडर्न बन जाओ !

    उत्तर देंहटाएं
  2. रेत के घरोंदे सा...........इसमें रेत के की जगह रेत का करें।
    मानकर स्मृतियों से
    मिटा दिया !

    पीड़ित प्रेमाभिव्‍यक्ति।

    उत्तर देंहटाएं
  3. बहुत सुंदर रचना,भावों की उम्दा अभिव्यक्ति,,,

    गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाए,,,
    recent post: गुलामी का असर,,,

    उत्तर देंहटाएं

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छूटे हुए पल

कहीं कुछ छूट जाता है
जब न समेट पाने की वजह से नहीं,
बल्कि जानबूझकर
छोड़ दिया जाता है;
वह कचोटता रहता है उम्रभर।

छोड़े जाने की
कोई तो वजह रही होगी
या रही होगी मजबूरी,
जब हमने छोड़ दिया;
उस छूटे हुए पल को,
जिसे उम्र आज भी 
आकुल है पा लेने को।
काश.....................

यादें: जो रहती हैं ताउम्र ताज़ी।

जज़्बातों को
तुम समेट लेना,
मैं रख लूँगा
तुम्हारा मन। कि बिखरने न पाये
सबंधों की गठरी
और हाँ,
बोझ भी न बनने पाये।
बना रहे
जीवन में हल्कापन।। क्यों
समय से पहले
टूट जाती हैं
ये ख्वाहिशें, या
हो जाती हैं पैदा
नयी ख्वाहिशें,
पूरी होने पर।
क्या यही है जीवन।। तुम्हारी अँगुलियों में,
लिपटा हुआ
मेरे केशों का
बिखरा हुआ प्रेम।
समेट रहा हूँ
शामों को यादों में
भीग रहा है हमारा मन।।

तुम्हें तुम्हारा आफताब मुबारक

तुम्हें तुम्हारा आफताब मुबारक
हमको हमारा ये चराग मुबारक।

तुम क्या मुकम्मल करोगे मसलों को,
तुम्हें ही तुम्हारा जवाब मुबारक।

हो सकते थे और बेहतर हालात,
रख लो, तुम्हें तुम्हारा हिसाब मुबारक ।

सूरत बदलने से नहीं बदलती सीरत,
तुमको ये तुम्हारा नया हिजाब मुबारक।

खुद ही खुद तुम खुदा बन बैठे हो
तुम्हें यह तुम्हारा खिताब मुबारक।

तुम्हें तुम्हारा आफताब मुबारक
हमको हमारा ये चराग मुबारक।