बुधवार, 2 जनवरी 2013

अहसास!


दूर तक 
देखता हूँ,
एक तेरा ही 
अक्श दिखता है !

हर पल 
तेरा ही 
अहसास 
मेरे अन्तस् में 
छाया रहता है !

पर जब 
स्वप्न टूटता है 
एक ही झटके में 
ख्यालों ओर 
अहसासों का 
बवंडर 
न जाने कहाँ 
चला जाता है,

और यादों का 
एक मुस्कुराता हुआ 
अहसास 
मेरे पास 
ठहर जाता  है !
  ?

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