गुरुवार, 31 जनवरी 2013

जिजीविषा जीवन की !


जीना चाहते हो!
क्या जीने की 
जिजीविषा 
शेष है तुममें 
या समयपूर्व 
मर चुकी है !!


जब तुमें 
संवेदनाओं की 
अनुभूति ही 
नहीं होती तो 
फिर जीवन और 
मृत्यु में 
क्या अंतर शेष है?
फिर क्यों जीना 
चाहते हो !

पर अफ़सोस 
हर कोई जीवन की 
जिजीविषा में
जीवन को 
लक्ष्य हीन बना कर
मृत प्राय हो गया है !

न जाने कब 
पल-दो-पल का ही 
लक्ष्य पूर्ण जीवन 
जी पायेगा ये 
भ्रमित मनुष्य !

5 टिप्‍पणियां:

  1. न जाने कब
    पल-दो-पल का ही
    लक्ष्य पूर्ण जीवन
    जी पायेगा ये
    भ्रमित मनुष्य !
    ......................प्राय: ये अनुभूति सभी संवेदनशील लोगों को होती है। बहुत अच्‍छा प्रयास।

    उत्तर देंहटाएं
  2. सच कहा आपने आज मनुष्य सच में भ्रमित है ...
    सुन्दर रचना

    उत्तर देंहटाएं
  3. न जाने कब
    पल-दो-पल का ही
    लक्ष्य पूर्ण जीवन
    जी पायेगा ये
    भ्रमित मनुष्य !

    वास्तविकता को दिखती सुंदर रचना |

    उत्तर देंहटाएं
  4. बहुत सुन्दर रचना ......मेरे ब्लॉग पर आपका स्वागत है

    उत्तर देंहटाएं
  5. जीवन के सही रूप को दर्शाती
    बहुत कहीं गहरे तक उतरती कविता ------बधाई

    उत्तर देंहटाएं

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