मंगलवार, 29 जनवरी 2013

पशु से सामाजिक प्राणी तक !


जन्म तो लिया था,
मनुज के रूप में 
पर भूख  ने विवश कर दिया,
बनने को  पशु से बदत्तर !

आखिर जीवन को
जीवित रखने के लिए 
कुछ तो करना ही पड़ेगा!

शायद यह 
मानव और पशु का 
वर्गीकरण ही 
एक भ्रम ही है;
अन्यथा 
पशु और मानव में 
क्या अंतर है ?


या कुछ पशुओं ने 
स्वयं को पृथक करने  हेतु 
सिद्धांत बनाएं होंगे 
पशु से सामाजिक प्राणी बनने के लिए; 
जो आज उनकी नस्लों के लिए ही 
बाधक बन गये हैं !

8 टिप्‍पणियां:



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  2. आज तो कोई अंतर नहीं दिखता.....

    सार्थक रचना...

    अनु

    उत्तर देंहटाएं
  3. वास्तव में जो पशु स्वयं को मानव समझ बैठे हैं या जताना चाहते हैं उनकी पहचान होना बहुत ज़रूरी है क्योंकि समाज के लिए वे ही सबसे बड़ा खतरा हैं ! प्रभावशाली प्रस्तुति !

    उत्तर देंहटाएं

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