मंगलवार, 12 जून 2012

जिन्दगी तपती रेत है, तुम नदिया की शीतल धारा !

जिन्दगी तपती रेत है,
तुम नदिया की शीतल धारा !

रात चांदनी थी चुभती,
अब चंदा भी लगता है प्यारा !
जिन्दगी तपती रेत है,
तुम नदिया की शीतल धारा !

तुम  आये  मेरे आंगन में,
जैसे सिमट आया हो जग सारा !
जिन्दगी तपती रेत है,
तुम नदिया की शीतल धारा !

तोड़ के बंधन न जाओ,
सिवा तुम्हारे कौन हमारा !
जिन्दगी तपती रेत है,
तुम नदिया की शीतल धारा !

मिलना तो सपना ही था,
बिखरी सांसों का हो सहारा !
जिन्दगी तपती रेत है,
तुम नदिया की शीतल धारा !

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