गुरुवार, 21 जून 2012

सीं दो मेरे होठो को,

सीं दो मेरे होठो को,
अब और गीत गा न पाउँगा !

तन्हा-तन्हा रातें हैं,
बीते कल की बातें है,
तेरी याद मैं भुला न पाउँगा !

कहाँ गयीं वो कसमें ,
कहाँ गये  वादे रस्में ,
चैन दिल को दिला न पाउँगा !

मेरे जीवन की तुम सांसें,
तुमसे जुडी हैं मेरी आशें,
तुझ बिन खुद को जिला  पाउँगा !

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