बुधवार, 13 जून 2012

नेह निमन्त्रण !


रुनझुन करती पायलिया 
शाम ढले तुम आजाओ !

चौंक उठती हैं ये  साँसें,
तेरे आने की आहट पाकर !
नाम से ही तेरे चंदा भी 
छुप जाता अम्बर में  जाकर!

अंधियारे जीवन में तुम 
आकर उजाला कर जाओ!  
रुनझुन करती पायलिया 
शाम ढले तुम आजाओ !

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