गुरुवार, 22 दिसंबर 2011

बटोही रे !

ऐ जिन्दगी तू उसे क्यों पुकारे ,
जो चला गया उसकी राह क्यों निहारे?

चाह था तूने ही उसे , वो तेरा प्यार था,
पर उसे तेरे प्यार पे न ऐतबार था ,
वो रह गया तन्हा , तेरे ही सहारे
ऐ जिन्दगी तू उसे क्यों पुकारे ,
जो चला गया उसकी राह क्यों निहारे?

हर वफा पर उसे बेवफाई ही मिली,
अपनों से भी उसे रुसवाई ही मिली,
जीत न सका जग से, खुद से क्यों हारे.......
ऐ जिन्दगी तू उसे क्यों पुकारे ,
जो चला गया उसकी राह क्यों निहारे?

जब तक रहा तुझे ही उसने चाहा,
प्यार की हर एक रस्म को निबाहा ,
दे न सका खुशियाँ , तो गम से क्यूँ मारे...
ऐ जिन्दगी तू उसे क्यों पुकारे ,
जो चला गया उसकी राह क्यों निहारे?

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