शुक्रवार, 30 दिसंबर 2011

असत्य, अस्तित्त्व सत्य का



 असत्य
जिसने बदला इतिहास,
जिसके होने पर होता है 
सत्य का परिहास!

असत्य,
रखते हुए अस्तित्त्व,
करता सत्य को साकार;
सत्य का जब हुआ उपहास,
असत्य से ही मिला प्रभास!

किचित
असत्य नहीं  होता यथार्थ!  
परन्तु, सत्य के महत्त्व का 
आधार है यही असत्य,

हम अब भी सत्य  
असत्य  के महत्त्व के मध्य,
हैं  विभ्रमित और विस्मित !

इस पार है असत्य ,
उस पार वह प्रत्यक्ष ,
सत्य !!

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